ChatGPT को यूज़र्स का “प्लीज़” और “थैंक यू” बोलना क्यों पड़ रहा है करोड़ों में?​

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने एक मज़ेदार लेकिन हैरान करने वाली बात बताई है। उन्होंने बताया कि लोग जब ChatGPT से बात करते हैं और “प्लीज़” या “थैंक यू” जैसे शिष्टाचार वाले शब्द इस्तेमाल करते हैं, तो उससे कंपनी को ज़्यादा खर्च उठाना पड़ता है।

ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हर बार जब आप ऐसा कोई एक्स्ट्रा शब्द टाइप करते हैं, तो ChatGPT को उसे समझने और जवाब देने में ज़्यादा कंप्यूटिंग पावर लगती है। यानी ज़्यादा बिजली, ज़्यादा सर्वर का इस्तेमाल और अंत में, ज़्यादा पैसा खर्च!

हर जवाब की होती है कीमत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ChatGPT एक सवाल का जवाब देने में करीब 2.9 वॉट-घंटे की बिजली खर्च करता है। अब सोचिए, अगर लाखों- करोड़ो लोग रोज़ AI से बात कर रहे हों और सब “गुड मॉर्निंग”, “प्लीज़”, “थैंक यू GPT” जैसे एक्स्ट्रा लाइनें डाल रहे हों, तो खर्च कितना बढ़ जाता होगा?

सिर्फ भाषा नहीं, इन छोटे-छोटे एक्स्ट्रा टोकन (शब्द) से पर्यावरण पर भी असर होता है क्योंकि ज़्यादा एनर्जी की खपत होती है।

फ्यूचर की टेक को स्मार्ट बनाना होगा

AI का मकसद है कि वह इंसानों जैसा अनुभव दे, यानी बात करने में आपको लगे कि आप किसी इंसान से बात कर रहे हैं। लेकिन अब टेक कंपनियों को सोचना होगा कि ऐसा एक्सपीरियंस कैसे दें जिससे ना खर्च बढ़े और ना पर्यावरण को नुकसान हो।

OpenAI का यह खुलासा दिखाता है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ इनोवेशन से नहीं, ऑप्टिमाइज़ेशन से भी आगे बढ़ती है।

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